बीकानेर पीबीएम अस्पताल में बड़ा स्वास्थ्य संकट: बाजार से मंगाए गए इंजेक्शन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल, जांच के घेरे में ऑक्सीटोसिन सप्लाई
बीकानेर | जनवाणी राजस्थान न्यूज़ | 10 जून 2026
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल पीबीएम हॉस्पिटल, बीकानेर एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ने और उनकी किडनी फेल होने का मामला सामने आया है। सभी महिलाओं का ICU में इलाज चल रहा है और उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रसूताओं को ऑपरेशन के बाद रक्तस्राव नियंत्रित करने के लिए लगाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों पर संदेह जताया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया है कि सरकारी सप्लाई उपलब्ध नहीं होने के कारण ये इंजेक्शन बाजार से खरीदे गए थे। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिलाओं की हालत बिगड़ने के पीछे यही इंजेक्शन जिम्मेदार हैं या कोई अन्य कारण। जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?👇
जानकारी के अनुसार, सभी महिलाओं की उम्र 19 से 27 वर्ष के बीच है और हाल ही में उनकी सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के कुछ घंटों बाद ही उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव, पेशाब रुकना, प्लेटलेट्स कम होना और किडनी प्रभावित होने जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। देखते ही देखते सभी की हालत गंभीर हो गई और उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा।इनमें से एक प्रसूता प्रीति की हालत सबसे गंभीर बताई जा रही है। वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और अब तक कई बार डायलिसिस किया जा चुका है। अन्य महिलाओं का भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार जारी है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और ICU में संक्रमण के संकेत मिलने की बात भी सामने आई है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को विशेष सफाई, फॉगिंग और डिफॉगिंग करवानी पड़ी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी फेल होने के पीछे संक्रमण के अलावा अत्यधिक रक्तस्राव या दवाओं की प्रतिक्रिया जैसे अन्य कारण भी हो सकते हैं।
आखिर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन क्या होता है?👇
ऑक्सीटोसिन एक महत्वपूर्ण दवा है जिसका उपयोग प्रसव के दौरान और सिजेरियन डिलीवरी के बाद गर्भाशय के संकुचन बढ़ाने तथा अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है।
यदि इस दवा की गुणवत्ता में कमी हो, दवा दूषित हो या गलत तरीके से संग्रहित की गई हो, तो मरीजों में गंभीर दुष्प्रभाव होने की आशंका बढ़ सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऑक्सीटोसिन के कारण किडनी फेल होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
जांच के आदेश, ड्रग कंट्रोलर भी सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। अस्पताल प्रशासन और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की ओर से अलग-अलग जांच समितियां गठित की गई हैं। ड्रग कंट्रोलर विभाग ने संदिग्ध इंजेक्शनों के नमूने जब्त कर उनकी गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह दवा की गुणवत्ता का मामला है, संक्रमण का असर है या फिर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है।
बाजार से क्यों मंगाए गए इंजेक्शन?👇
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अस्पताल में सरकारी सप्लाई के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में मरीजों के परिजनों को बाजार से इंजेक्शन खरीदकर लाने के लिए कहा गया।यही कारण है कि अब जांच का फोकस उन इंजेक्शनों की सप्लाई चेन, निर्माता कंपनी, बैच नंबर और गुणवत्ता परीक्षण पर केंद्रित हो गया है।ड्रग कंट्रोल विभाग ने संबंधित बैच के नमूने जब्त कर लिए हैं और उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
कोटा कांड से जुड़ रहे तार👇
बीकानेर की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कुछ सप्ताह पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में भी प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल होने का मामला सामने आया था। उस मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे और संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अब बीकानेर की घटना ने राजस्थान की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
जनवाणी राजस्थान न्यूज़ की अपील
यह मामला बेहद संवेदनशील है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। प्रशासन और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएंगे।
रिपोर्ट: जनवाणी राजस्थान न्यूज़ डेस्क
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