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सुदामा चरित्र के भावपूर्ण वर्णन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ भव्य समापन, वाल्मीकि समाज का किया सम्मान


कुचामन। 8 जून 2026 (हर्षित गोयल)

कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस पर राष्ट्रवादी विचारक परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके परम मित्र सुदामा के पावन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।



फोटो कैप्शन:
कुचामन सिटी के हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज एवं उपस्थित श्रद्धालु।

आचार्य श्री ने सुदामा और श्रीकृष्ण की निष्कलंक मित्रता, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा का महत्व बताते हुए कहा कि प्रभु अपने भक्त के प्रेम के भूखे होते हैं। सच्चे मन से किया गया स्मरण, सेवा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता। सुदामा चरित्र के मार्मिक प्रसंगों को सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।



कथा के अंतिम दिन संपूर्ण श्रीमद्भागवत कथा का सार प्रस्तुत करते हुए नौ दिनों के दौरान वर्णित प्रमुख प्रसंगों की पुनरावृत्ति कर श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सेवा, संस्कार, प्रेम और मानवता का संदेश दिया गया। कथा के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया गया।



इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा मिलन की भव्य एवं मनोहारी झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरे कथा परिसर में जय श्रीकृष्ण के जयघोष गूंज उठे।समापन समारोह के दौरान आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज ने कथा श्रवण के लिए पधारे वाल्मीकि समाज के लोगों का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के महान ऋषि, आदर्श महाकवि और समाज के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, संगठन और सामाजिक एकता को समय की आवश्यकता बताते हुए युवाओं से अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन सुखाराम कड़वा (गुरु कृपा प्रॉपर्टीज) के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कथा के सफल आयोजन पर यजमान परिवार एवं ग्रामवासियों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर महाआरती, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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