कुचामन, ३जून २०२६! हर्षित गोयल (संवाददाता)
हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्तों को धर्म, भक्ति एवं संस्कारों का संदेश दिया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि मनुष्य को क्रोध और अहंकार से दूर रहकर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। इसके साथ ही माता अनुसूया जी के आदर्श चरित्र एवं पतिव्रत धर्म का वर्णन किया गया। सती चरित्र के माध्यम से भगवान शिव के प्रति माता सती के समर्पण, त्याग एवं श्रद्धा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।कथा में भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया गया। भगवान शिव की अलौकिक बारात, देवताओं की उपस्थिति तथा माता पार्वती की कठोर तपस्या का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर भगवान शिव एवं माता पार्वती की मनोहारी झांकी भी सजाई गई, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान का संदेश देते हुए जीवन में सदाचार और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।द्वितीय दिवस पर क्षेत्रीय पारिक परिषद त्रिवेणी धाम, शाहपुरा (जयपुर) द्वारा कथा व्यास परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज का सम्मान भी किया गया। इस दौरान परिषद पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मान पत्र भेंट कर अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन एवं जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा का लाभ लेने का आग्रह किया।



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