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40 साल पुरानी लापरवाही से सरकारी स्कूल कानूनी विवाद में फसा , दानदाता परिवार की बेटी कोर्ट से स्टे ले आई

 नागौर,३ जून २०२६! रमेश सिंह (प्रधान संपादक)

 नागौर जिले के बुटाटी क्षेत्र के निकट स्थित सिरसला गांव का राजकीय विद्यालय इन दिनों भूमि विवाद के कारण चर्चा में है। करीब 40 वर्ष पहले गांव के एक भामाशाह परिवार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी निजी भूमि विद्यालय निर्माण के लिए दान कर दी थी। इसी भूमि पर बाद में सरकारी स्कूल भवन का निर्माण हुआ और वर्षों से यहां बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। लेकिन विद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा भूमि का नामांतरण (ट्रांसफर) राजस्व रिकॉर्ड में नहीं करवाए जाने के कारण अब यह मामला कानूनी विवाद का रूप ले चुका है।

फोटो क्रेडिट- गूगल मैप्स 
इसी बीच परिवार में बंटवारे का विवाद होने पर मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जिस खसरा नंबर में स्कूल की जमीन आती है, उसी खसरे की अन्य जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। दानदाता परिवार की बेटी दुर्गा देवी ने आशंका जताई कि विवादित जमीन बेची जा सकती है, इसलिए उसने कोर्ट से स्टे ले लिया। अब उसी स्टे के कारण स्कूल की जमीन का नामांतरण भी नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल बनने के बाद संबंधित विभागों ने रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की जरूरत नहीं समझी। जमीन निजी खातेदारी में चलती रही। अब विवाद बढ़ने के बाद प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है। इससे भविष्य में स्कूल पर भी संकट बढ़ सकता हैविशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान के कई सरकारी विद्यालय ऐसी जमीनों पर संचालित हो रहे हैं, जिनके स्वामित्व संबंधी दस्तावेज वर्षों से अपडेट नहीं किए गए हैं। यही कारण है कि उत्तराधिकार, बंटवारे या पारिवारिक विवाद के मामलों में स्कूलों की जमीनें भी कानूनी उलझनों में फंस जाती हैं। इस मामले ने सरकारी विद्यालयों की भूमि सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय की भूमि का रिकॉर्ड जल्द स्पष्ट किया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था पर किसी प्रकार का संकट न आए।

जनहित का सवाल:
यदि किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक हित में भूमि दान की जाती है, तो क्या संबंधित विभागों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे समय रहते कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रिकॉर्ड दुरुस्त करें? सिरसला का यह मामला इसी प्रश्न को फिर से सामने ला रहा है।

(नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है। अंतिम निर्णय न्यायालय और संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।)

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