२८ मई २०२६! रमेश सिंह (प्रधान संपादक)
जोधपुर। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए अंतरिम जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। अदालत ने आसाराम को तुरंत सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों को पर्याप्त मानते हुए सजा को सही ठहराया।
गौरतलब है कि नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत ने आसाराम को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत मिली हुई थी।
अब हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि आसाराम को तुरंत आत्मसमर्पण करना होगा। साथ ही अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए संबंधित एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
फैसले के बाद पीड़िता पक्ष और महिला अधिकार संगठनों ने इसे न्याय की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय यौन अपराधों के मामलों में सख्त संदेश देता है और कानून के सामने सभी समान हैं।
उधर, आसाराम समर्थकों में फैसले को लेकर निराशा देखी जा रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अब उनके पास सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है। हालांकि फिलहाल उन्हें हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।
फैसले के बाद राजस्थान पुलिस और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सक्रिय हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस चर्चित मामले में यह फैसला अहम कानूनी पड़ाव माना जा रहा है। अदालत के सख्त रुख से यह संकेत मिला है कि गंभीर अपराधों में राहत पाने के लिए मजबूत कानूनी आधार आवश्यक हैं।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आसाराम कब सरेंडर करते हैं और आगे यह कानूनी लड़ाई किस दिशा में बढ़ती है।
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