नागौर, 7 अगस्त।रमेश सिंह (प्रधान संपादक)
कृषि विज्ञान केंद्र, अठियासन के तत्वावधान में ढावा ग्राम में किसानों के लिए प्राकृतिक खेती विषय पर ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में किसानों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों, इसके लाभों तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली के महत्व के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. गोपीचंद सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए इसे अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों को स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा जीवामृत एवं बीजामृत जैसे जैविक इनपुट के उपयोग की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान पशु वैज्ञानिक बुधाराम चौधरी ने वर्षा ऋतु में पशुओं के रख-रखाव, स्वच्छता, संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के संबंध में जानकारी देते हुए मौसम परिवर्तन के दौरान पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी।
इस अवसर पर किसानों को जीवामृत एवं बीजामृत तैयार करने तथा उनके उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती एवं पशुपालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से चर्चा कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
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