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बुटाटी धाम मंदिर समिति पर 22.74 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का आरोप, जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंपी

 

नागौर | १२ जुलाई २०२६ रमेश सिंह (प्रधान संपादक)

नागौर जिले के बुटाटी धाम स्थित संत श्री चतुरदास महाराज मंदिर विकास समिति से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में जिला प्रशासन की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिला कलक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया करीब 22 करोड़ 74 लाख 74 हजार 946 रुपये की वित्तीय अनियमितता, देवस्थान निधियों के दुरुपयोग और सुनियोजित गबन की बात कही गई है



जिला कलक्टर द्वारा 10 फरवरी को गठित जांच समिति ने लगभग चार माह 13 दिन की जांच के बाद 23 जून को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने मंदिर के रिकॉर्ड, आय-व्यय, बैंक खातों, निर्माण कार्यों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच में कई गंभीर वित्तीय विसंगतियां दर्ज होने का उल्लेख किया है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 15.16 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का प्रथम दृष्टया आकलन किया गया है। वहीं, समिति का आरोप है कि 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल को उपलब्ध नहीं कराए गए। पिछले वर्षों के औसत के आधार पर इस अवधि में 7.58 करोड़ रुपये की अनुमानित अनियमितता जोड़ी गई है।

जांच समिति ने संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विस्तृत पुलिस जांच, राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के तहत राशि की वसूली, वर्तमान समिति को हटाकर प्रशासक नियुक्त करने, सभी बैंक खातों एवं एफडी को फ्रीज करने तथा फोरेंसिक ऑडिट कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा कार्यालय, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य अभिलेख सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सील करने की भी अनुशंसा की गई है।

रिपोर्ट में आयकर विभाग और देवस्थान विभाग को भी पूरे मामले से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। जांच समिति का कहना है कि मंदिर परिसर सरकारी भूमि पर स्थित है और मंदिर की आय एवं संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की भी जांच आवश्यक है।

कलक्टर का बयान

जिला कलक्टर देवेन्द्र कुमार ने कहा कि बुटाटी मंदिर मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। आगामी सुनवाई में जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेगा तथा आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेशानुसार की जाएगी।

नोट: यह समाचार जिला प्रशासन की जांच समिति की रिपोर्ट और जिला कलक्टर के आधिकारिक बयान पर आधारित है। आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक एवं वैधानिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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