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नागौर फसल बीमा घोटाले में बढ़ा जांच का दायरा, दलालों के बाद अब विभागीय कड़ियों की भी पड़ताल

 

नागौर फसल बीमा घोटाले में बढ़ा जांच का दायरा, दलालों के बाद अब विभागीय कड़ियों की भी पड़ताल

नागौर। 23अगस्त २०२६,रमेश सिंह (प्रधान संपादक)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के साथ कथित फर्जीवाड़े के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पांचौड़ी थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब SOG और नागौर पुलिस की SIT पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।



शनिवार को जांच एजेंसियों ने करीब 12 संदिग्धों से लगभग छह घंटे तक पूछताछ की। इसके साथ ही तीन स्थानों पर तलाशी लेकर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किसानों की जमीन, खसरा और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी कथित गिरोह तक कैसे पहुंची और फर्जी बीमा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कहीं किसी स्तर पर मदद तो नहीं मिली।

दलालों के बाद अब विभागीय कड़ियों पर नजर

प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड जुटाकर फर्जी बीमा फॉर्म और दस्तावेज तैयार करने की बात सामने आई है। इसी वजह से जांच का दायरा अब केवल कथित दलालों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।

जांच एजेंसियां कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों और अन्य संबंधित स्तरों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, अभी तक किसी पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक, सांख्यिकी विभाग के कर्मचारी, कृषि विभाग के अधिकारी या बीमा कंपनी के कर्मचारी को इस मामले में आरोपी घोषित किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इनकी भूमिका को फिलहाल जांच के दायरे में संभावित कड़ी के तौर पर ही देखा जा रहा है।

चार आरोपी गिरफ्तार, नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद

पांचौड़ी पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से करीब 3 लाख रुपये नकद, फर्जी फसल बीमा फॉर्म, दस्तावेज, आधार कार्ड और बैंक पासबुक बरामद किए गए हैं। वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो भी जब्त की गई है।

पुलिस के मुताबिक कथित गिरोह किसानों के खेत, नाम और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी जुटाकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और फसल बीमा की प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करता था। मामले में पांचौड़ी थाने में चार शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।

SOG की एंट्री से बढ़ी हलचल

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तरीय SOG भी जांच में शामिल है। SOG और नागौर पुलिस की SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा है, कितने किसान इसके निशाने पर आए और फर्जीवाड़े में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।

जांच में बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और बरामद दस्तावेजों को अहम माना जा रहा है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आगे अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।

बड़ा सवाल: नेटवर्क की जड़ें कहां तक?

नागौर फसल बीमा मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जीवाड़ा केवल दलालों के स्तर पर हुआ या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक, सांख्यिकी विभाग, कृषि विभाग या बीमा कंपनी से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।फिलहाल जांच एजेंसियां पूछताछ और दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही हैं। घोटाले की वास्तविक रकम और पूरा नेटवर्क जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।



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